Thursday, 18 April 2013

ताजमहल पर शायरी


सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर,
इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता?
बस पत्थर बन के रह जाता “ताज महल
अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता..

5 comments:

  1. ना मैसेज ना फोन

    ना पिक्चर ना टोन

    और बने फिरते हो दुनिया के डोन

    जब नंबर लिया था तो कहते थे

    कि रोज करेंगे फोन

    अब कहते हो कि हम आपके हैं कौन?

    ReplyDelete